{"product_id":"ramdhari-singh-dinkar-rachnavali-volumes-1-14","title":"Ramdhari Singh 'Dinkar' Rachnavali: Volumes 1 - 14","description":"\u003cp\u003eदिनकर जी की स्वराज्योत्तर कृतियों में गद्य की महिमा प्रखरता से निखरी है । स्वराज्य के बाद दिनकर जी के अनेक गद्य-ग्रन्थ प्रकाशित हुए हैं । इनमें 'उजली आग' को किस कोटि में रखना ठीक है इसका निर्णय हिन्दी के आलोचक अब तक नहीं कर पाए हैं । वास्तव में इस छोटी-सी पुस्तक में प्रधानता बोध-कथाओं की है । इन कथाओं के कथानक कभी तो यूरोप में प्रचलित पुराणों से लिये गए हैं तो कभी चीन के दर्शनाचार्यों से किन्तु, कितने ही कथानक बिलकुल मौलिक हैं । इसके अतिरिक्त इस ग्रन्थ में कुछ विचारोत्तेजक काव्यंगन्धी निबन्ध भी हैं । सबसे विलक्षण निबन्ध 'नूतन काव्य-शास्त्र' है जिसकी शैली गद्यकाव्य की है किन्तु चिन्तन काव्यशास्त्रीय है । -डी. लक्ष्मीनारायण सुधांशु\u003c\/p\u003e","brand":"Kunzum Book Club","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45593313214655,"sku":null,"price":5000.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0552\/2423\/8271\/files\/DinkarRachnavali.jpg?v=1777353962","url":"https:\/\/kunzum.shop\/products\/ramdhari-singh-dinkar-rachnavali-volumes-1-14","provider":"Kunzum Book Club","version":"1.0","type":"link"}